सड़क दुर्घटना में घायल मरीज का इलाज अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड ने किया, लोगों ने उठाए सवाल?
सड़क दुर्घटना में घायल मरीज का इलाज अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड ने किया, लोगों ने उठाए सवाल?

खूंटी जिले के तोरपा स्थित रेफरल अस्पताल में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को तोरपा में दो बाइक की टक्कर में एक युवक के घायल होने के बाद, उसके इलाज और ड्रेसिंग का काम अस्पताल के एक सिक्योरिटी गार्ड को करते हुए देखा गया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में गुस्सा और नाराजगी फैला दी है।घटना की शुरुआत तोरपा के ‘टून टून चाय दुकान’ के पास हुई, जहाँ दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। इस हादसे में एक बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि एंबुलेंस के समय पर न पहुंचने के कारण, मौके पर मौजूद लोगों ने ही घायल को किसी तरह रेफरल अस्पताल पहुँचाया।अस्पताल पहुँचने के बाद जो हुआ, वह और भी चौंकाने वाला था। लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे और घायल मरीज की ड्रेसिंग और प्राथमिक इलाज का जिम्मा एक सिक्योरिटी गार्ड को सौंप दिया गया। जब घायल को लेकर पहुँचे लोगों ने इसकी आपत्ति जताई और डॉक्टर या नर्स को बुलाने की मांग की, तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें अस्पताल परिसर से बाहर निकाल दिया गया।जब रेफरल अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और नर्स तैनात हैं, तो एक सुरक्षा गार्ड को मरीज का इलाज करने की ज़िम्मेदारी क्यों दी गई? उस समय डॉक्टर कहाँ थे? अगर डॉक्टर मौजूद थे भी, तो उन्होंने यह काम एक अप्रशिक्षित व्यक्ति को क्यों सौंपा? किसके आदेश पर एक गार्ड के द्वारा इलाज जैसा गंभीर और संवेदनशील काम करवाया जा रहा था?लोगों ने चिंता जताई कि अगर इस पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया गया और कार्रवाई नहीं हुई, तो कल को यहाँ सुरक्षा गार्डों के द्वारा ही मरीजों का ऑपरेशन भी किया जाने लगेगा, जो जानलेवा साबित हो सकता है।इस घटना ने तोरपा और आसपास के इलाकों के लोगों में रोष पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासी और घटना के गवाह बने लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मामले की ओर खींचा है। उनकी मांग है कि इस घटना की तुरंत जाँच की जाए और लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों व अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोहराई न जाए और मरीजों को समय पर और योग्य डॉक्टरों द्वारा उचित इलाज मिल सके।